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ट्रैफिक पुलिस के दो कॉंस्टेबल की अवैध वसूली: VIDEO :वीडियो बनाने वाले युवक ने मारपीट-मोबाइल तोड़ने का लगाया आरोप; डीसीपी ने किया सस्पेंड


 जयपुर के गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र में तैनात ट्रैफिक पुलिस के दो कॉन्स्टेबलों पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, मारपीट और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवक की शिकायत पर पुलिस विभाग ने दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

पीड़ित युवक के अनुसार, वह जयपुर में गोपालपुरा बाईपास के पास रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है और रोजाना कोचिंग के लिए गोपालपुरा से रिद्धी-सिद्धी मोड से गुजरता है। इस दौरान उसने वहां तैनात ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल शेरसिंह मीणा और जितेन्द्र को कई बार ऑटो रिक्शा चालकों और स्कूटी-बाइक चालकों से बिना चालान किए अवैध रूप से पैसे वसूलते हुए देखा। आरोप है कि दोनों कॉन्स्टेबल चालान की कार्रवाई किए बिना ही वाहन चालकों से रिश्वत लेकर उन्हें छोड़ देते थे। 


अवैध वसूली का वीडियो आया सामने

युवक ने बताया कि एक दिन उसने इस अवैध वसूली का वीडियो बना लिया। जब उसने पुलिसकर्मियों को चेतावनी दी कि वे यह गलत काम बंद करें अन्यथा शिकायत करेगा, तो दोनों कॉन्स्टेबल उससे माफी मांगने लगे और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड न करने की बात कही। इसी दौरान उन्होंने युवक का मोबाइल नंबर भी ले लिया।

आरोप है कि अगले दिन शाम करीब 7 से 8 बजे पुलिसकर्मियों ने युवक को फोन कर यह कहकर गोपालपुरा पुलिया के नीचे बुलाया कि उसने वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया है और “साहब” बुला रहे हैं, जबकि युवक का कहना है कि उसने वीडियो कहीं भी अपलोड नहीं किया था। वहां पहुंचने पर उसे अंदर बुलाकर बाहर से कुंडी (लॉक) लगा दी गई।


पीड़ित का आरोप है कि उस समय कॉन्स्टेबल शेरसिंह मीणा शराब के नशे में धुत था। दोनों पुलिसकर्मियों ने उससे जबरन मोबाइल फोन छीन लिया, वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया और विरोध करने पर मोबाइल फोन तोड़ दिया। इसके बाद युवक के साथ मारपीट की गई और धमकी दी गई। पीड़ित किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकल पाया।

इस घटना की शिकायत युवक ने 6 जनवरी को डीसीपी ट्रैफिक सुमित मेहरड़ा के समक्ष प्रस्तुत की। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई की गई।

दोनों ट्रैफिक पुलिसकर्मी सस्पेंड

डीसीपी ट्रैफिक सुमित मेहरड़ा ने बताया कि मामले में दोनों ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच करवाई जा रही है।

पीड़ित ने मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए और तोड़े गए मोबाइल फोन की क्षतिपूर्ति राशि उन्हें दिलाई जाए।

यह मामला पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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